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Kishan Majdoor Ekta
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बीमा योजना

किसानों एवं फसलों के लिए सरकार द्वारा ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) प्रति बीघा समग्र बीमा सुनिश्चित किए जाने हेतु — संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के अंतर्गत मांग

विधिक मांग–पत्र

हम, Kishan Majdur Ekta, यह विधिक मांग–पत्र भारत के अन्नदाता किसानों के जीवन, आजीविका एवं सम्मान की संवैधानिक रक्षा हेतु प्रस्तुत कर रहे हैं। देश में बार–बार सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, कीट प्रकोप, जलवायु परिवर्तन जैसी आपदाओं के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो रही हैं, जिससे किसानों की आजीविका पूर्णतः समाप्त हो जाती है।

I. संवैधानिक एवं विधिक आधार (Legal & Constitutional Grounds)

1. अनुच्छेद 21 – जीवन का अधिकार (Right to Life): माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्थापित है कि जीवन का अधिकार केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानजनक आजीविका (Right to Livelihood) भी इसका अभिन्न अंग है। फसल नष्ट होने पर पर्याप्त बीमा न होना, किसानों के अनुच्छेद 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

2. अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार (Right to Equality): विभिन्न क्षेत्रों/राज्यों में किसानों को मिलने वाली बीमा राशि में भारी असमानता मनमानी एवं भेदभावपूर्ण है, जो अनुच्छेद 14 के विरुद्ध है।

3. अनुच्छेद 38 एवं 39 (नीति निदेशक तत्व): राज्य का दायित्व है कि वह आर्थिक न्याय, आजीविका के पर्याप्त साधन तथा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे। अपर्याप्त फसल बीमा इन दायित्वों के विपरीत है।

4. राज्य की सकारात्मक जिम्मेदारी (Positive Obligation of State): जब कृषि को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना गया है, तब किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना राज्य का अनिवार्य कर्तव्य है।

II. वर्तमान व्यवस्था की कानूनी कमियां

A. मौजूदा फसल बीमा योजनाओं में

  • वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं होती
  • भुगतान में अत्यधिक विलंब होता है
  • बीमा राशि किसान की वास्तविक लागत, आय और जोखिम के अनुपात में अत्यंत अपर्याप्त है

⚠️ यह स्थिति किसानों को कर्ज़, गरीबी एवं आत्महत्या की ओर धकेलती है, जो राज्य की संवैधानिक विफलता को दर्शाती है।

III. कानूनी मांग (Legal Demand)

उपरोक्त तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में, Kishan Majdur Ekta भारत सरकार से यह औपचारिक एवं कानूनी मांग करती है:

1

₹10,00,000 प्रति बीघा बीमा

प्रत्येक किसान एवं उसकी फसल के लिए ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) प्रति बीघा का सरकार–प्रायोजित, अनिवार्य एवं पूर्ण बीमा सुनिश्चित किया जाए।

💰 दस लाख रुपये प्रति बीघा सुनिश्चित किया जाए

2

बीमा कवरेज में सभी जोखिम शामिल हों

प्राकृतिक आपदाएं (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि), कीट एवं रोग प्रकोप, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न क्षति

3

60 दिनों के भीतर भुगतान

क्षति के 60 दिनों के भीतर बीमा राशि का प्रत्यक्ष भुगतान किसान के खाते में किया जाए।

4

बीमा प्रीमियम सरकार द्वारा वहन

बीमा प्रीमियम का पूर्ण वहन केंद्र/राज्य सरकार द्वारा किया जाए, ताकि किसान पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

IV. चेतावनी (Notice)

यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि में सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो Kishan Majdur Ekta संविधान के अनुच्छेद 226/32 के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तथा अन्य वैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की होगी।

निष्कर्ष

यह मांग किसी अनुदान या कृपा की नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों और राज्य के विधिक कर्तव्यों की पूर्ति से संबंधित है।

किसान बचेगा तभी देश बचेगा।

💰

₹10,00,000

प्रति बीघा बीमा राशि

📅

60 दिन

भुगतान की समय सीमा

🛡️

प्रीमियम मुक्त

पूर्ण वहन सरकार द्वारा

🛡️

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