किसानों एवं फसलों के लिए सरकार द्वारा ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) प्रति बीघा समग्र बीमा सुनिश्चित किए जाने हेतु — संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के अंतर्गत मांग
⚠️ यह स्थिति किसानों को कर्ज़, गरीबी एवं आत्महत्या की ओर धकेलती है, जो राज्य की संवैधानिक विफलता को दर्शाती है।
उपरोक्त तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में, Kishan Majdur Ekta भारत सरकार से यह औपचारिक एवं कानूनी मांग करती है:
प्रत्येक किसान एवं उसकी फसल के लिए ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) प्रति बीघा का सरकार–प्रायोजित, अनिवार्य एवं पूर्ण बीमा सुनिश्चित किया जाए।
💰 दस लाख रुपये प्रति बीघा सुनिश्चित किया जाए
प्राकृतिक आपदाएं (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि), कीट एवं रोग प्रकोप, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न क्षति
क्षति के 60 दिनों के भीतर बीमा राशि का प्रत्यक्ष भुगतान किसान के खाते में किया जाए।
बीमा प्रीमियम का पूर्ण वहन केंद्र/राज्य सरकार द्वारा किया जाए, ताकि किसान पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि में सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो Kishan Majdur Ekta संविधान के अनुच्छेद 226/32 के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तथा अन्य वैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की होगी।
यह मांग किसी अनुदान या कृपा की नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों और राज्य के विधिक कर्तव्यों की पूर्ति से संबंधित है।
किसान बचेगा तभी देश बचेगा।
प्रति बीघा बीमा राशि
भुगतान की समय सीमा
पूर्ण वहन सरकार द्वारा
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