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किसान मजदूर एकता

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एमएसपी की गारंटी

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का उत्पादन लागत के अनुरूप निर्धारण

विधिक मांग पत्र

हम Kishan Majdur Ekta, देशभर के किसानों एवं कृषि मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह विधिक मांग पत्र भारत के संविधान, स्थापित न्यायिक सिद्धांतों तथा केंद्र सरकार की घोषित नीतियों के आलोक में प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. संवैधानिक आधार (Constitutional Basis)

1. अनुच्छेद 14 (Article 14) – समानता का अधिकार: जब किसान को उसकी उत्पादन लागत से कम मूल्य मिलता है, तो यह उसे अन्य वर्गों की तुलना में असमान स्थिति में डालता है।

2. अनुच्छेद 21 (Article 21) – जीवन और गरिमा का अधिकार: माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर यह स्पष्ट किया गया है कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार भी है। लागत से कम MSP किसान की आजीविका और गरिमा का उल्लंघन है।

3. अनुच्छेद 23 (Article 23) – बंधुआ/जबरन श्रम का निषेध: यदि किसान को उसकी लागत भी न मिले, तो यह आर्थिक रूप से बलात श्रम (Forced Labour) की श्रेणी में आता है।

2. नीति एवं आयोगों के आधार

1. स्वामीनाथन आयोग (National Commission on Farmers) ने स्पष्ट अनुशंसा की थी कि: MSP = C2 लागत + कम से कम 50% लाभ जबकि वर्तमान में अधिकांश फसलों में MSP, वास्तविक उत्पादन लागत के अनुरूप नहीं है।

2. केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मंचों पर यह सार्वजनिक आश्वासन दिया गया है कि MSP किसानों को लाभकारी बनाया जाएगा, किंतु नीतिगत क्रियान्वयन का अभाव बना हुआ है।

3. कानूनी प्रश्न (Legal Issues)

  • MSP को केवल घोषणा मात्र तक सीमित रखना, बिना कानूनी गारंटी के, मनमाना (Arbitrary) और असंवैधानिक है।
  • उत्पादन लागत (बीज, खाद, कीटनाशक, श्रम, सिंचाई, ईंधन) लगातार बढ़ रही है, जबकि MSP में आनुपातिक वृद्धि नहीं की जा रही।
  • यह स्थिति नीति विफलता (Policy Failure) एवं राज्य के कल्याणकारी दायित्व के उल्लंघन को दर्शाती है।

4. विधिक मांग (Legal Demand)

अतः Kishan Majdur Ekta, भारत सरकार से विधिक रूप से निम्न मांग करती है:

1 MSP का निर्धारण वास्तविक उत्पादन लागत के आधार पर किया जाए
2 न्यूनतम 25% सुनिश्चित लाभ कानूनी रूप से जोड़ा जाए
3 MSP को कानूनी अधिकार बनाया जाए
4 MSP निर्धारण प्रक्रिया में किसान संगठनों की अनिवार्य भागीदारी
5 MSP के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान

5. चेतावनी (Notice)

यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि में ठोस एवं विधिसम्मत निर्णय नहीं लिया जाता है, तो Kishan Majdur Ekta:

  • • संविधान के अनुच्छेद 32 एवं 226 के अंतर्गत माननीय सर्वोच्च न्यायालय / उच्च न्यायालय की शरण लेने,
  • • एवं अन्य संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी,

जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरण की होगी।

निष्कर्ष

किसान को लागत से कम मूल्य देना केवल आर्थिक अन्याय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। MSP पर लाभ सुनिश्चित करना कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि कानूनी और नैतिक दायित्व है।

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