किसानों को अपनी बेटियों की शादी के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किए जाने के संबंध में कानूनी मांग
हर किसान की इच्छा होती है कि वह अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करे। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह सपना अधूरा रह जाता है। यह मांग हर किसान की बेटी के उज्ज्वल भविष्य और सम्मानजनक विवाह हेतु है।
किसानों को अपनी बेटियों की शादी के लिए ऋण लेने के लिए मजबूर होना और उच्च ब्याज देना, उनके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
अन्य वर्गों के लिए विवाह ऋण की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि किसानों के लिए ऐसी कोई विशेष योजना नहीं है।
राज्य महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान कर सकता है। किसानों की बेटियों की शादी हेतु ऋण योजना इसी के अंतर्गत आती है।
उपरोक्त तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर, Kishan Majdur Ekta भारत सरकार से निम्नलिखित कानूनी मांग करती है:
किसानों को अपनी बेटियों की शादी के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मिलना चाहिए।
ऋण प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, जिसमें ज्यादा दस्तावेजों की आवश्यकता न हो।
शादी की तारीख से कम से कम 30 दिन पहले ऋण स्वीकृत हो जाना चाहिए, ताकि समय पर व्यवस्था की जा सके।
इस ऋण के लिए किसान से कोई जमीन या संपत्ति गिरवी रखने की मांग नहीं की जाए।
ब्याज मुक्त ऋण
सामाजिक दायित्व
समय सीमा
संपत्ति सुरक्षित
यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि में ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो Kishan Majdur Ekta संविधान के अनुच्छेद 32 एवं 226 के अंतर्गत माननीय न्यायालय की शरण लेने, एवं अन्य संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरण की होगी।
हर बेटी किसी की लाडली होती है। उसकी शादी का सपना हर माता-पिता देखते हैं। किसानों के लिए यह सपना साकार करना आसान बनाना राज्य का कर्तव्य है। बेटी की शादी में सहायता करना कोई अनुदान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी का विवाह सुनिश्चित करो।
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