किसानों के फसली ऋण की पूर्ण माफी हेतु
⚠️ यह स्थिति सीधे-सीधे किसान के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। अत्यधिक कर्ज़, ब्याज और वसूली के दबाव में जी रहा किसान सम्मानपूर्वक जीवन नहीं जी पा रहा, जो अनुच्छेद 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
राज्य का कर्तव्य है कि वह आर्थिक असमानताओं को कम करे और कमजोर वर्गों की रक्षा करे। किसान देश का सबसे बड़ा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग है, फिर भी उसे ब्याज-मुक्त सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही।
राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रीय संसाधनों का वितरण सार्वजनिक हित में हो। आर्थिक व्यवस्था से शोषण न हो, ब्याज आधारित फसली ऋण प्रणाली किसान के आर्थिक शोषण को जन्म देती है।
हालाँकि ये न्यायालय में सीधे लागू नहीं, परंतु सरकार के लिए नैतिक व संवैधानिक रूप से बाध्यकारी हैं। कृषि को सहायता देना राज्य का संवैधानिक दायित्व है, कोई अनुदान नहीं।
प्रत्येक नागरिक को कोई भी वैध व्यवसाय, व्यापार अथवा पेशा करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। किसानों को खेती करने का अधिकार है, लेकिन ब्याज का बोझ इस अधिकार पर अवांछित प्रतिबंध है।
"राज्य की नीतियाँ यदि नागरिक के जीवन, आजीविका और गरिमा को प्रभावित करती हैं, तो राज्य का दायित्व है कि वह सुधारात्मक कदम उठाए।"
— माननीय सर्वोच्च न्यायालय
किसानों की आत्महत्या, ऋण-दबाव और भूमि नीलामी राज्य की नीतिगत विफलता को दर्शाती है।
उपरोक्त तथ्यों व संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर हम भारत सरकार से निम्नलिखित कानूनी मांगें करते हैं:
सभी छोटे, सीमांत एवं मध्यम किसानों के समस्त फसली ऋण तत्काल प्रभाव से माफ किए जाएं। बकाया ब्याज, दंडात्मक ब्याज और वसूली प्रक्रिया समाप्त की जाए।
भविष्य में किसानों को दिया जाने वाला फसली ऋण पूर्णतः ब्याज-मुक्त हो। ऋण की शर्तें सरल, पारदर्शी और किसान-अनुकूल हों।
ऋण न चुका पाने के कारण किसी भी किसान के विरुद्ध रिकवरी, नीलामी या आपराधिक कार्यवाही न की जाए।
यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो Kishan Majdur Ekta निम्न विधिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी:
अतः, यह अपेक्षा की जाती है कि भारत सरकार किसानों के साथ हो रहे इस आर्थिक अन्याय को समाप्त करने हेतु तत्काल एवं प्रभावी कदम उठाएगी।
किसानों को ब्याज के बोझ से मुक्त करने के लिए हमसे जुड़ें और इस मांग का समर्थन करें
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