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Kishan Majdoor Ekta
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किसान मजदूर एकता

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किसान मजदूर एकता

पूर्ण ऋण माफी

किसानों के फसली ऋण की पूर्ण माफी हेतु

कानूनी मांग-पत्र (Legal Demand)

हम Kishan Majdur Ekta, देश के करोड़ों किसानों और कृषि-मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह कानूनी मांग-पत्र (Legal Demand) भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (Facts of the Case)

1. भारत का किसान लगातार अनिश्चित मौसम, बढ़ती उत्पादन लागत, कम MSP, और बाज़ार अस्थिरता से जूझ रहा है।

2. इन परिस्थितियों में किसान को फसल उत्पादन हेतु बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से फसली ऋण लेना पड़ता है।

3. परंतु जब फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता या प्राकृतिक आपदा आती है, तो किसान ऋण चुकाने में असमर्थ हो जाता है।

4. इसके परिणामस्वरूप किसान पर ब्याज का बोझ, रिकवरी नोटिस, कानूनी कार्यवाही, और मानसिक उत्पीड़न बढ़ता है।

⚠️ यह स्थिति सीधे-सीधे किसान के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Legal & Constitutional Grounds)

(A) अनुच्छेद 21 – जीवन और गरिमा का अधिकार

भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। अत्यधिक कर्ज़, ब्याज और वसूली के दबाव में जी रहा किसान सम्मानपूर्वक जीवन नहीं जी पा रहा, जो अनुच्छेद 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

(B) अनुच्छेद 38 – सामाजिक न्याय का दायित्व

राज्य का कर्तव्य है कि वह आर्थिक असमानताओं को कम करे और कमजोर वर्गों की रक्षा करे। किसान देश का सबसे बड़ा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग है, फिर भी उसे ब्याज-मुक्त सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही।

(C) अनुच्छेद 39(b) एवं 39(c)

राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रीय संसाधनों का वितरण सार्वजनिक हित में हो। आर्थिक व्यवस्था से शोषण न हो, ब्याज आधारित फसली ऋण प्रणाली किसान के आर्थिक शोषण को जन्म देती है।

(D) नीति-निर्देशक सिद्धांत (DPSP)

हालाँकि ये न्यायालय में सीधे लागू नहीं, परंतु सरकार के लिए नैतिक व संवैधानिक रूप से बाध्यकारी हैं। कृषि को सहायता देना राज्य का संवैधानिक दायित्व है, कोई अनुदान नहीं।

(ग) अनुच्छेद 19(1)(g)

प्रत्येक नागरिक को कोई भी वैध व्यवसाय, व्यापार अथवा पेशा करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। किसानों को खेती करने का अधिकार है, लेकिन ब्याज का बोझ इस अधिकार पर अवांछित प्रतिबंध है।

3. न्यायिक दृष्टांत (Judicial Principles)

"राज्य की नीतियाँ यदि नागरिक के जीवन, आजीविका और गरिमा को प्रभावित करती हैं, तो राज्य का दायित्व है कि वह सुधारात्मक कदम उठाए।"

— माननीय सर्वोच्च न्यायालय

किसानों की आत्महत्या, ऋण-दबाव और भूमि नीलामी राज्य की नीतिगत विफलता को दर्शाती है।

4. हमारी कानूनी मांगें (Legal Demands)

उपरोक्त तथ्यों व संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर हम भारत सरकार से निम्नलिखित कानूनी मांगें करते हैं:

1

फसली ऋण की पूर्ण माफी

सभी छोटे, सीमांत एवं मध्यम किसानों के समस्त फसली ऋण तत्काल प्रभाव से माफ किए जाएं। बकाया ब्याज, दंडात्मक ब्याज और वसूली प्रक्रिया समाप्त की जाए।

2

ब्याज-मुक्त नए फसली ऋण

भविष्य में किसानों को दिया जाने वाला फसली ऋण पूर्णतः ब्याज-मुक्त हो। ऋण की शर्तें सरल, पारदर्शी और किसान-अनुकूल हों।

3

कोई दंडात्मक/कानूनी कार्रवाई नहीं

ऋण न चुका पाने के कारण किसी भी किसान के विरुद्ध रिकवरी, नीलामी या आपराधिक कार्यवाही न की जाए।

5. चेतावनी (Notice for Further Legal Action)

यदि उपरोक्त मांगों पर उचित समयावधि के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो Kishan Majdur Ekta निम्न विधिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी:

  • अन्य संवैधानिक व विधिक मंचों पर किसानों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु कार्रवाई करना

अतः, यह अपेक्षा की जाती है कि भारत सरकार किसानों के साथ हो रहे इस आर्थिक अन्याय को समाप्त करने हेतु तत्काल एवं प्रभावी कदम उठाएगी।

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किसानों के ऋण माफी के लिए आवाज उठाएं

किसानों को ब्याज के बोझ से मुक्त करने के लिए हमसे जुड़ें और इस मांग का समर्थन करें

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